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Sunday, 12 November 2017

गीतांजलि - महाकवि रविन्द्र नाथ ठाकुर , हिंदी अनुवाद , कविता संख्या - 95

कविता संख्या - 95 
I WAS not aware of the moment when I first crossed the threshold of this life....

मुझे पता नहीं उस क्षण  के बारे में , 

जब पहली बार मैंने किया था प्रवेश जीवन की दहलीज में,

एक शक्ति थी अज्ञात जिसने मुझे किसी विराट रहस्य की तरह  खोल दिया था इस प्रकार 

जैसे मध्य रात्रि  में वन  में  खिल उठे कली कोई 

सुबह  देखा था प्रकाश मैंने क्षण भर में अनुभव हुआ था  

मैं अपरिचित नहीं संसार से , जब उस  अज्ञात और अनंत स्वरूप ने,
माँ के  रूप में  मुझे भर लिया था निज भुजाओं में ,

मुझे ज्ञात  है  कि मृत्यु के समय 

वही शक्ति अज्ञात  प्रकट होगी  फिर से,इस प्रकार जैसे हो मुझसे परिचय पुराना  ,

जीवन  से प्रेम  है मुझे ,मृत्यु से भी मैं करूंगा प्रेम उसी प्रकार  


जैसे दाएं वक्ष से मां जब बच्चे को अलग करती है 

तो सहज ही 

बाएं  वक्ष की तरफ लपकता है शिशु ,


पाने के लिए संतुष्टि को ,


फिर से.


TRANSLATION FROM ENGLISH BY PRABHUDAYAL KHATTAR
FOR VIDEO VERSION OF THIS POEM IN ENGLISH CLICK https://www.youtube.com/watch?v=f527CZJUNFE

गीतांजलि - महाकवि रविन्द्र नाथ ठाकुर , हिंदी अनुवाद , कविता संख्या - 95

कविता संख्या - 95  I WAS not aware of the moment when I first crossed the threshold of this life.... मुझे पता नहीं उस क्षण  के बारे में ...